समाज Headline Animator

समाज

February 23, 2013

"प्यार कहाँ से लाऊँ?"


मैंने ये पोस्ट डॉ० रूपचन्द्र शास्त्री जी के ब्लॉग पर पढ़ी थी जो मैं आपके साथ शेयर कर रहा हॅू !

आँखों का सागर है रोता,
अब मनुहार कहाँ से लाऊँ
सूख गया भावों का सोता
अब वो प्यार कहाँ से लाऊँ?

पैरों से तुमने कुचले थे,
जब उपवन में सुमन खिले थे,
हाथों में है फूटा लोटा,
अब जलधार कहाँ से लाऊँ?
अब वो प्यार कहाँ से लाऊँ?

छल की गागर में छल ही छल,
रस्सी में केवल बल ही बल,
हमदर्दी का पहन मुखौटा,
जग को बातों से भरमाऊँ।
अब वो प्यार कहाँ से लाऊँ?

जो बोया वो काट रहे हैं,
तलुए उसके चाट रहे हैं,
अपना सिक्का निकला खोटा,
अब कैसे मैं हाथ मिलाऊँ?
अब वो प्यार कहाँ से लाऊँ?

2 comments:

  1. प्रभावशाली ,
    जारी रहें।

    शुभकामना !!!

    आर्यावर्त

    आर्यावर्त में समाचार और आलेख प्रकाशन के लिए सीधे संपादक को editor.aaryaavart@gmail.com पर मेल करें।

    ReplyDelete

टिप्पणी करने के लिए धन्यवाद.................

Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...