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समाज
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August 7, 2013

घर के गद्दारों को मिटाना बहुत जरुरी है



केवल किस्मत पर मत थोपो अपने पापों कोदूध पिलाना बंद करो अब आस्तीन के सांपो को....!!!!
अपने सिक्के खोटे हो तो जान पर बन आती हैऔर कश्मीर की घाटी खून से सन जाती है....!!!!
पकड़ गर्दन उनको खींचो बाहर अब उजाले मेंचाहे दुश्मन सात समुन्दर पार छुपा हो ताले में....!!!!
इन सब षडयंत्रों से पर्दा उठाना बहुत जरूरी हैपहले घर के गद्दारों को मिटाना बहुत जरूरी है....!!!!
. बेटी है कुदरत का उपहार. मत करो इसका तिस्कार .
. बेटी बचाओ, बेटी पढाओ. एक आदर्श माँ-बाप कहलाओ.
. जीने का भी उसका अधिकार . बस चाहिए उसको, आपका प्यार .
. आपकी लालसा है बेकार. बिन बेटी के चले संसार .
. ऐसा कोई काम नहीं, जो बेटियाँ कर पाई है . बेटियां तो आसमान से, तारे तोड़ की लाई है .
. दुल्हन अगर दुनिया में, दूल्हा कुंवारा रह जायेगा. क्या होगा इस दुनियां का, कौन मानव वंश चलाएगा...
घेर लेंगी जब मुझे चारों तरफ से गोलियांछोड़ कर चल देंगी जब मुझे दोस्तोंकी टोलियाँ
वतन उस वक्त भी मैं तेरे ही नगमें गाऊंगाआज़ाद ही जिन्दा रहा, आज़ाद ही मर जाऊंगा...!

July 27, 2013

हरा भरा गुलिस्तान अब बंजर देखा है ।



मैंने हवाओं का कुछ ऐसा असर देखा है...
 हरा भरा गुलिस्तान अब बंजरदेखा है... 
हम तो कहते गए भाई-भाई उनको...
 नजरों में उनकी मैंने बेपनाह जहर देखा है...
 न जाने क्यों नफरत सी हो गयी है मुझे उनसे...
 वतन से गद्दारी करतेमैंनेउन्हें जब से एक नजर देखा है... 
बेघर हो गए है मेरे सारे भाई खुद अपने घरों से... 
उनके घरों में अब दरिंदों का बसर मैंने देखा है..
 घर में घुसकर ही दिखा जाते है वो हैवानियत अपनी.. 
उन हैवानों का कुछ इस कदर कहर मैंने देखा है... 
रोता-बिलखता रह गया वो मासूम अपनी माँ के लिए... 
दंगों का कुछ ऐसा दर्दनाक मंजर मैंने देखा है... 
वक्त नहीं के किसी के भी पास अब औरों केलिए...
 उनका घर से ऑफिस तक का सफ़रमैंने देखा है.... 
इंसान अब बन गया है पत्थर की मूरत यारों... 
पत्थर का एक ऐसा ही आज मैंने शहर देखा है... 
फिर कांपेगी रूह उन लोगों की हमारे नाम से ही... 
उन हैवानो की आँखों में उनके कामों के अंजाम का डर मैंने देखा है...
 वक्त आएगा और चूमेगा TIRANGA फिर से इस नभ को... 
ख्वाब मैंने कुछ ऐसाशामों-सहर देखा है................. 


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