नमस्कार, सुप्रभात मेरे प्यारे पाठकगण आज कई महीनों बाद मेरी वापसी मेरे ब्लॉग पर हुयी है। मैं इतने दिनों अपनी रीड़ में आई चोट के कारण बेड रेस्ट पर था , इसके इलाज और पढ़ाई में व्यस्त था। इसीलिए मैं इतने दिनों तक ब्लॉग से दूर था,
इसलिए आपसे माफी चाहूँगा। पर अब मैं पूरी तरह से ठीक हो गया हूँ इसीलिए मैंने अब ब्लॉग पर फिर से वापसी कर ली है।
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July 5, 2013
April 23, 2013
सेक्स की भूख या हैवानो का भोजन… ?
ये देश और दिल्ली , दरिन्दगी की हद को पार करने का पर्याय बन चुका है.. एक से बढ़्कर एक दरिन्दा अपनी-अपनी हैवानियत का नजारा पेश कर रहा है.. और ये सरकार और कानून चुपचाप तमाशायी बन बैठा है.. आज पीएम साहब कह रहे है “हम सदमे मे है..” कल कानून कहेगा कि “हम अन्धे है. ऐसे हैवानियत के लिए मेरे पास सजा का कोई प्रावधान नही है..” और भेड़िये की तरह खाकी वर्दी पहने पुलिसिये उल्टे पीड़ितो को चुप कराकर,
डरा-धमका कर,
रिश्वत देकर,
मामले को दबाने की कोशिश करके हैवानो को शह दे रही है । ऐसे मे एक मासूम जनता कैसे रहे.. किस पर यकीं करे.. कानून पर,
सरकार पर,
पुलिस पर,
समाज पर या अपने पड़ोसी पर.. ? हर जगह हैवान मौजूद है.. फिर कहाँ जाएँ .. ? कैसे रहे..? कौन करेगा इनकी हिफाजत..?
अभी अभी दिल्ली मे एक 5 साल की बच्ची के साथ जो घटना हुई.. क्या इसे आप सेक्स की भूख कहेंगे…?
या इंसानियत के सर पर नाचता हुआ हैवानियत का बुखार…
।
बच्ची के पेट से मोमबत्ती और तेल की शीशी का निकलना इस बात को साबित करता है कि किसी कमजोर और मासूमो पर अपनी हैवानियत का गुबार कैसे निकाला जाता है.. । हैवानियत की बात यही तक खत्म नही हो जाती,
जब खाकी वर्दी पर इंसानियत के बड़े-बड़े तमगे लगाकर हैवानो से रक्षा करने के लिए तत्पर लोग भी अपनी इंसानियत भूल कर चन्द सिक्को के लालच में हैवानो की सरपरस्ती मे जुट जाते है.. ।
अब जरा इस घटना के अंजाम के बारे मे सोचते है…
कुछ का सस्पेंड होगा.. कुछ नेताए. कुछ दिन तक इस पर अपनी राजनीतिक भाषण देकर फायदा उठायेंगे…..
जनता विरोध प्रदर्शन करेगी … जाम लगायेगी…
फिर उस पर भी लाठी चार्ज होगा….
सरकार कोई नया कानून बनाने का दावा करेगी.. पीड़ितो को वोट के लालच मे बहुत से लोग मुआवजा देंगे…
दोषी को फाँसी लगाने का माँग होगा…इस मे महीने बीत जायेंगे..
लोग अपनी अपनी रोजी-रोटी मे व्यस्त हो जायेंगे.. मामला ठण्ढ़े बस्ते मे चला जाएगा…
कुछ दिन बाद फिर कोई नई दरिन्दगी का नमूना पेश होगा…
फिर वही कहानी…
समझ नही आता की एक इंसान क्यो भूलता जा रहा है अपनी इंसानियत…
क्यों दूसरे के बच्चो मे अपना बच्चा नही दिखाई देता है … ? क्यों दूसरे के माँ-बहन मे अपनी माँ-बहन नही झलकती है. ..? क्यों अपने आस-पड़ोस मे अपने घर में भी आपस मे प्रेम से दो शब्द बोलना भी दूभर हो गया है..? क्यों आपस की छोटी-छोटी बातो पर भी अपनी इज्जत जाती हुई दिखाई देती है.. ? क्यों सब अपने-अपने से ही मतलब रख रहे है…
? एक-दूसरे को क्यों समझना भूल गये है..?
कहाँ चले गये है वो धर्म के नाम पर तरह-तरह के ढ़ोंग करवाने वाले रंग-बिरंगे बापू … जो टी0वी0 चैनलो पर सिर्फ अपने-अपने तिजारत के चक्कर मे लगे हुये रहते है.. पाप करने पर नर्क से डराने वाले धर्म के ढ़ोंगी बाबा सब कहाँ चले गये है.. ?
मै उनसे पूछना चाहता हूँ कि क्या ये सब करने वाले जानते नही कि वो पाप कर रहे है.. ? क्या उन्हे नर्क जाने का डर नही..? पिछले 1-2 वर्षो मे जितने धर्म के भाषणी लोग बढ़े है उतनी ही इंसानियत कम होती दिखाई पड़ी है.. । हैवानियत और दरिन्दगी हर गली-मुहल्ले मे दिखाई देने लगी है. । ये तो इक्के-दुक्के वो घटनाएँ है जो मीडिया कर्मी की नजर पड़्ने पर अखबारों और न्युज चैनलो के माध्यम से लोग जान जाते है.. । लेकिन हर रोज कही-न-कही इस तरह की घटनाएँ घटती है और कानून के इन नपुंसक रखवालो द्वारा चन्द पैसो के लालच मे दबा दी जाती है…
।
इन घटनाओ को रोकने के लिए सरकार या कानून कुछ नही कर सकता .. । क्योंकि जब तक इंसानों के अन्दर की इंसानियत वापस नही आ जाती कानून कुछ नही कर सकता…
।
ऐसे दरिन्दो की सजा किसी अदालत मे न होकर .. अदालत के बाहर हो और तुरंत हो,
दोषी को पकड़ते ही उसे सड़क के बीचो-बीच हो,
चौराहे पर हो…
जिससे आने वाले दरिन्दो को दरिन्दगी की ऐसी सजा देखकर फिर से कोई ऐसा जुल्म करने की सोचे भी नही…
क्योंकि फाँसी और जेल जैसे आम सजा तो लोग पाना ही चाहते है…
क्योंकि इस जिन्दगी से और इस रोजी-रोटी से छुटकारा हर कोई पाना चाहता है….।
अब सवाल ये है इस नपुंसक सरकार की नपुंसक कानून द्वारा अपने बहू-बेटियों को इन दरिन्दो से छुपाकर कहाँ रखे..? कैसे पाले…
?
June 28, 2012
किसी को आपकी हेल्प की जरूरत है एक क्लीक यहाँ भी !
ये मैंने एक ब्लॉग पर पड़ा था तो उस पर पड़कर मैंने भी इस को पोस्ट करने की सोचा जो मैं आपको इस आदमी के बारे में बता रहा हूँ।
मेरी उम्र 27 वर्ष है। मैं पहले विकलांग नहीं था। मैंनें जिला उद्योग केन्द्र (सरकारी कार्यालय) मे प्राइवेट रूप से वर्ष 2002 से वर्ष 2008 तक कम्प्यूटर आपरेटर के रूप में एम०एस०ऑफिस, हिन्दी अंग्रेजी में डाटा इंट्री, इंटरनेट पर कार्य किया है। मैने वर्ष 2005 में निजी (छोटा) कम्प्यूटर सेन्टर शुरू किया। ये मेरे दोनो कार्य एक साथ सुचारू रूप से चल रहे थे। पर अचानक वर्ष 2008 में मेरी तबियत खराब हो गयी और चिकित्सकीय जांच के दौरान पता चला कि मेरे सरवाइकल स्पाइन मे खराबी हो गई है और मुझसे एक साथ दों आपरेशन कराने के लिए कहा गया। यह दोनो आपरेशन मैनें वर्ष 2008-दिसम्बर में पी०जी०आई, लखनऊ में कराये। दुर्भाग्यवश आपरेशन सफल न होने के कारण मैं पैरों से अब चल नहीं पाता हु। दो आपरेशन होने के कारण लगभग तीन वर्ष तक बेडरेस्ट पर रहा, जिसके कारण मेरे सभी प्रकार के कार्य छूट गये, कम्प्यूटर सेन्टर भी बंद हो चुका था। मेरे सभी आर्थिक श्रोत बंद हो चुके थे।
इनके ऊपर जो बिता आप सब ने पढ़ ही लिया होगा तो अगर आपमें से किसी के पास कोई भी काम हो तो इनसे जरुर करवाए ये आपका काम घर बेठे बेठे ही कर देंगे मैंने अपने ब्लॉग के साईट बार में इनके बारे में एड भी दिया है ताकि कोई भी इनसे कांटेक्ट कर के डीटीपी से जुड़ा कोई भी काम करा सकता है इनसे काम करने के बाद इनके काम की कीमत जरुर दे इनका नाम और पता सब में निचे लिख रहा हु उम्मीद करता हु कि कोई न कोई तो होगा जो इन्हें जॉब देगा एक ऐसी जॉब जिसे ये घर बेठे बेठे ही कर पाएंगे और अपने वर्द्ध माता पिता का सहरा बनेगे और घर के खर्चे उन पेसो से उठायेंगे जो ये आपका काम करके कमाएंगे
इनका नाम ये है
और चलते चलते एक बात और बोलना चाहूँगा की इनके बारे में आप भी अपने ब्लॉग या फेसबुक पर लिख सकते है चाहो तो मेरी ही पोस्ट को कॉपी करके लोगो तक पंहुचा सकते हो ताकि इन्हें जल्दी से जल्दी कोई काम मिल जाये अगर आपके इस छोटे से प्रयास से इनको काम मिल जाता है तो इनकी जिन्दगी सवर जाएगी.............
मेरी उम्र 27 वर्ष है। मैं पहले विकलांग नहीं था। मैंनें जिला उद्योग केन्द्र (सरकारी कार्यालय) मे प्राइवेट रूप से वर्ष 2002 से वर्ष 2008 तक कम्प्यूटर आपरेटर के रूप में एम०एस०ऑफिस, हिन्दी अंग्रेजी में डाटा इंट्री, इंटरनेट पर कार्य किया है। मैने वर्ष 2005 में निजी (छोटा) कम्प्यूटर सेन्टर शुरू किया। ये मेरे दोनो कार्य एक साथ सुचारू रूप से चल रहे थे। पर अचानक वर्ष 2008 में मेरी तबियत खराब हो गयी और चिकित्सकीय जांच के दौरान पता चला कि मेरे सरवाइकल स्पाइन मे खराबी हो गई है और मुझसे एक साथ दों आपरेशन कराने के लिए कहा गया। यह दोनो आपरेशन मैनें वर्ष 2008-दिसम्बर में पी०जी०आई, लखनऊ में कराये। दुर्भाग्यवश आपरेशन सफल न होने के कारण मैं पैरों से अब चल नहीं पाता हु। दो आपरेशन होने के कारण लगभग तीन वर्ष तक बेडरेस्ट पर रहा, जिसके कारण मेरे सभी प्रकार के कार्य छूट गये, कम्प्यूटर सेन्टर भी बंद हो चुका था। मेरे सभी आर्थिक श्रोत बंद हो चुके थे।
वृद्ध माता और पिता की पूंजी मेरे आपरेशन व इलाज में खर्च हो गयी। न चल पाने के कारण मेरा ज्यादा कहीं आना-जाना नहीं हो पाता है। मैं उपरोक्त से सम्बंधित सभी कार्य घर में कम्प्यूटर पर कर सकता हु।
इनके ऊपर जो बिता आप सब ने पढ़ ही लिया होगा तो अगर आपमें से किसी के पास कोई भी काम हो तो इनसे जरुर करवाए ये आपका काम घर बेठे बेठे ही कर देंगे मैंने अपने ब्लॉग के साईट बार में इनके बारे में एड भी दिया है ताकि कोई भी इनसे कांटेक्ट कर के डीटीपी से जुड़ा कोई भी काम करा सकता है इनसे काम करने के बाद इनके काम की कीमत जरुर दे इनका नाम और पता सब में निचे लिख रहा हु उम्मीद करता हु कि कोई न कोई तो होगा जो इन्हें जॉब देगा एक ऐसी जॉब जिसे ये घर बेठे बेठे ही कर पाएंगे और अपने वर्द्ध माता पिता का सहरा बनेगे और घर के खर्चे उन पेसो से उठायेंगे जो ये आपका काम करके कमाएंगे
इनका नाम ये है
जीतेन्द्र/रोहित श्रीवास्तव
मो० वैटगंज, डॉ० भूरा की गली,
हरदोई, उ०प्र०, भारत।
ई-मेल पता-rsri189@gmail.com
कान्टेक्ट नम्बर : +91-8896741369
एजुकेशन - स्नातक
कम्प्यूटर ज्ञान -
हिन्दी व अंग्रेजी में डाटा इंट्री
(ऑनलाइन व ऑफलाइन)
एम०एस०ऑफिस, डी०टी०पी० व इन्टरनेट।
और चलते चलते एक बात और बोलना चाहूँगा की इनके बारे में आप भी अपने ब्लॉग या फेसबुक पर लिख सकते है चाहो तो मेरी ही पोस्ट को कॉपी करके लोगो तक पंहुचा सकते हो ताकि इन्हें जल्दी से जल्दी कोई काम मिल जाये अगर आपके इस छोटे से प्रयास से इनको काम मिल जाता है तो इनकी जिन्दगी सवर जाएगी.............
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सहायता
March 27, 2012
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